आंदोलन के 8वें दिन पर क्या सरकार निकाल पायेगी किसानों के लिए समाधान

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03 Dec. Vadodara: कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली-हरियाणा बॉर्डर पर किसानों के आंदोलन का आज आठवां और अहम दिन है, जिस पर सबकी नज़रें टिकी हुई है। 40 किसान नेताओं की सरकार के साथ विज्ञान भवन में दोपहर 12.30 बजे से किसानों संघ बातचीत चल रही है। यह बैठक सरकार की तरफ से कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर अध्यक्षता कर रहे हैं। जब बीच में लंच ब्रेक हुआ था, तो किसानों ने सरकारी दावत खाने से मना कर दिया। किसान अपना खाना साथ लाए थे, और वही खाया। उन्होंने कहा कि सरकार का खाना या चाय हमें मंजूर नहीं है।

Credit: Dainik Bhaskar

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इससे पहले 1 दिसंबर को हुई बैठक में भी किसानों ने सरकार की तरफ से ऑफर की गई चाय लेने से इंकार कर दिया और कहा कि चाय नहीं, मांगें पूरी कीजिए। आप धरनास्थल पर आइए, आपको जलेबी खिलाएंगे।

आज पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और अकाली दल के नेता प्रकाश सिंह बादल ने किसानों के समर्थन में अपना पद्मा विभूषण लौटा दिया है। बादल को 2015 में इस अवार्ड से सम्मानित किया गया था। बादल की पार्टी शिरोमणि अकाली दल 22 साल से एनडीए के साथ गठबंधन में थी, लेकिन अब किसान कानूनों के विरोध में सितंबर में गठबंधन तोड़ दिया। इससे पहले 17 सितंबर को हरसिमरत कौर बादल ने भी मोदी कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया था।

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आज 40 किसान नेताओं की सरकार के साथ विज्ञान भवन में बातचीत हो रही है। वहीं सरकार की तरफ से कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर इस बैठक की अध्यक्षता कर रहे हैं। बैठक से पहले तोमर ने सकारात्मक नतीजे निकालने का आश्वासन दिया है।

गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद सीएम अमरिंदर सिंह ने क्या कहा?

किसानो संघ मीटिंग से पहले आज गृहमंत्री से मुलाकात के लिए पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह दिल्ली पहुंचे। गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद सीएम अमरिंदर सिंह ने जानकारी दी कि गृहमंत्री से किसानों की समस्याओं का जल्द समाधान निकालने की अपील की है। इस मुद्दे से पंजाब की अर्थव्यवस्था और देश की सुरक्षा प्रभावित हो रही है। किसानों से भी जल्द से जल्द मामले को सुलझाने की अपील की है।

पंजाब सीएमओ ने बताया कि अमरिंदर ने एग्रीकल्चर प्रोड्यूस मार्केट कमिटी यानी कि एपीएमसी आधारित मंडी सिस्टम को जारी रखते हुए एमएसपी को बचाने पर जोर दिया। गृहमंत्री से अपील की कि खुले दिल से किसानों की बात सुनकर जल्द इस विवाद को सुलझाएं, ताकि किसान अपने-अपने घरों को लौट सकें।

उधर किसानों के साथ बैठक में रेल मंत्री पीयूष गोयल, वाणिज्य एवं उद्योग राज्यमंत्री सोम प्रकाश भी मौजूद थे। मीटिंग से पहले मंत्री सोम प्रकाश ने कहा था कि बातचीत से ऐसा समाधान निकालने की उम्मीद है जो किसानों और सरकार को भी मंजूर हो। सरकार अपनी ओर से यह बार-बार स्पष्ट कर चुकी है की एमएसपी की व्यवस्था जारी रहेगी और यह बात लिखित में देने को भी तैयार है।

1 दिसंबर को सरकार ने पंजाब और उत्तर प्रदेश के किसानों से अलग-अलग बात की थी। हालांकि इस बैठक से कोई नतीजा नहीं निकला। किसान नेता यह आरोप लगा रहे हैं कि सरकार समाधान की जगह साजिश रच रही है। सरकार किसानों से अलग-अलग बैठक कर उन्हें बांटने की कोशिश कर रही है।

कृषि होने आपत्तियों का 10 पेज का दस्तावेज तैयार किया

आज किसान और सरकार की चौथी बैठक है जबकि दिल्ली बॉर्डर पर आंदोलन शुरू करने के बाद यह दूसरी बार बातचीत हो रही है। इस मीटिंग के लिए सरकार और किसान बुधवार को दिन भर स्ट्रैटेजी बनाते रहे। किसानों ने 5 बार और सरकार ने दो बार मीटिंग की। तो वहीं किसानों ने कृषि कानून में आपत्तियों का 10 पेज का डॉक्यूमेंट तैयार किया है।

किसान आज की मीटिंग में सरकार के सामने रखेंगे यह पांच प्रमुख मांगे

  • पहली मांग रहेगी कि केंद्रीय कृषि कानूनों को तुरंत रद्द किया जाए।
  • दूसरी मांग है कि केंद्र की कमेटी की पेशकश मंजूर नहीं की जाएगी।
  • 5 मांगों में से तीसरी मांग है एमएसपी हमेशा लागू रहे और 21 फसलों को इसका फायदा मिले।
  • चौथी मांग है कि अभी तक किसानों को गेहूं, धान और कपास पर ही एमएसके मिलती है।
  • खुदकुशी करने वाले किसानों के परिवार को केंद्र से आर्थिक मदद प्रदान की जाए।

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