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क्यों ना पहले विरासत को ही संजोया जाए?

विश्वामित्री के तट में बसे हुए कामनाथ महादेव मंदिर एक ऐतिहासिक निर्माण का उदाहरण है

30 Dec. Vadodara: वडोदरा शहर की विश्वमित्री नदी निकट बसे हुए कामनाथ महादेव मंदिर के आज मानो खस्ता हालत हो चुकी है। शहर के मशहूर पार्क कमाटीबाग के पीछे और विश्वामित्री के तट पर स्थित है यह मंदिर।

वर्षों से शहर के लोग इस मंदिर में आते हैं। भारत की सनातन संस्कृति में 7 अखाड़े हैं, उनमें से एक अटल अखाड़ा इस मंदिर में मौजूद है। इस मंदिर में ऐसे 8 संतों की समाधि है जिन्होंने अपने शरीर का त्याग किया था। यह शहर की ऐसी विरासत मानी जाती है जहां खुद ऋषि विश्वमित्री ने तप किया था। साथ ही यह भी कहा जाता है कि यहां पहले सोने का वृक्ष हुआ करता था।

यूं मानो किस शहर के नीरज जैन इस विरासत को संजोए रखने की कोशिश में जुटे हुए हैं। नीरज जैन कहते हैं कि वडोदरा शहर नवनाथ की नगरी है। जब से 2014 से कावड़ यात्रा शुरू की है तब से हमने तय किया कि नवनाथ की नगरी में 1451 छोटे शिवलिंग और 647 बड़े शिव मंदिर है और अभी कुछ बन रहे हैं, जब इतनी अच्छी विरासत हमें मिली है जो हूबहू गंगा घाट की तरह है तो इसे संजोने में क्या दिक्कत है। यह तो मेरा धर्म है, मेरा फ़र्ज़ है।

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इस मंदिर में वर्तमान में खुदाई करने पर 27 सीढियां और पायी गयी हैं, जिसके बाद कुल 42 सीढियां हो चुकी हैं। कारपोरेशन द्वारा भी इसे लेकर लापरवाही बरती जा रही है।

वड़ोदरा शहर को शिव नगरी भी कहा जाता है क्योंकि वडोदरा शहर का रक्षण नौ नाथ खुद करते हैं और उन्हीं नवनाथ में से एक है कामनाथ महादेव।जिनका मंदिर विश्वमित्री के किनारे बना हुआ है लेकिन इस मंदिर की पायरी पिछले कई वक्त से पानी में और कचरे में डूबी हुई थी। यहां सफाई का अभाव था जिस पर सवाल उठने के बाद नवनाथ कावड़ समिति द्वारा यहां सफाई शुरू की गई है और इस सफाई में कई ऐतिहासिक निर्माण भी देखने मिल रहे हैं। जो पुराने जमाने में बनाए गए होंगे और अब प्रशासन की उदासीनता के चलते गंदगी में दफन हो गए थे। इस मामले की जानकारी दी नवनाथ कावड़ यात्रा समिति के सदस्य नीरज जैन ने।

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ऐसे में तमाम वड़ोदरा वासियों की ज़िम्मेदारी बनती है की जो हमारे पूर्वज विरासत के तौर पर छोड़ कर गए उसे आगे हम संजोये। किसी और परियोजना पर पैसे बर्बाद करने से बेहतर है की जो हमारे पास है उसे सुधारें।

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