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स्वाध्याय प्रवृत्ति के प्रणेता पूज्य पांडुरंग दादा कि आज जन्म जयंती

मनुष्य गौरव दिन

-Nalini Raval

19 अक्टूबर 2020

स्वाध्याय परिवार के स्थापक और जय योगेश्वर के नाm को गुंजा कर मानव क्रांति करने वाले दादा के नाम से जाने जाते पूज्य पांडुरंग शास्त्री आठवले की आज जन्म जयंती है। के रूप में आज स्वाध्याय परिवार ने उनकी जन्मजयंती मनाई।

त्रिकाल संध्या को एटम बम कहने वाले पांडुरंग दादा का कहना था, कि त्रिकाल संध्या करने से दुर्गुणों का नाश होता है, और सद्गुणों का विकास होता है। उन्होंने कहा की ईश्वर को कहीं ढूंढने जाने की जरूरत नहीं है, ईश्वर हर इंसान के अंदर मौजूद है। दूसरे का मान सम्मान करें ,यही ईश्वर का सम्मान और पूजा है ।प्रत्येक व्यक्ति को मनुष्य होने का गौरव होना चाहिए। उन्होंने तत्वज्ञान को और गीता को बहुत ही आसान तरीके से लोगों को समझाया । उन्होंने स्वाध्याय को एक परिवार रूप देखकर जाती -पांती के भेद मिटाए,और सभीको एक साथ एक ही छात्र के नीचे लाने में 83 साल तक अथक प्रयत्न किए। आगरी, वाघरी, सागरी, नागरीकाठात तमाम जातियों को एक ही सूत्र में बांधकर सही मायनों में मनुष्य गौरव का निर्माण किया ।उन्होंने अस्पृश्यता को जैसे सभी के मन से निकाल ही फेंका। भक्तिफेरी, भावफेरी करते स्वाध्यायीयों को उन्होंने प्रोत्साहित किया। योगेश्वर कृषि का किसानों के लिए उन्होंने सुन्दर प्रयोग किया।

पूज्य दादा जी ने 1954 में जापान के में आयोजित विश्व धर्म परिषद में” भक्ति इज ए सोशल फोर्स ” के विषय पर बात करते हुए भक्ति और अध्यात्म के नए आयाम विश्व के सामने रखें ।

उन्हें नोबेल प्राइज समकक्ष टेंपलटन अवार्ड, मैगसेसे अवॉर्ड ,पद्म विभूषण अवार्ड, सौराष्ट्र यूनिवर्सिटी द्वारा डिलीट की पदवी समेत कई अवार्ड से सम्मानित किया गया।

19 अक्टूबर 1920 को जन्मे पांडुरंग दादा का 25 अक्टूबर 2003 को दीवाली के दिन देहविलय हुआ।आज उनका समग्र कार्यभार उनकी बेटी जयश्री दीदी संभाल रही है।दादा आज हमारे बीच नहीं है, लेकिन उनकी बातें,उनके विचार हमेशा जिंदा रहेंगे।

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