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आज हिंदी दिवस : आओं हिंदी होने पर गर्व करें…

आज हिंदी दिवस : आओं हिंदी होने पर गर्व करें...

File photo

14-Sep : Vadodara हिंदी केवल एक भाषा ही नहीं बल्कि भावनाओं का उमड़ता सैलाब है, जो हर दिन सफलता के नए सोपान गढ़ रही है और एक नदी की तरह आगे बढ़ रही है। देश में करीब 77 प्रतिशत लोग हिंदी बोलते हैं। यही कारण है कि हिंदी को राज भाषा का दर्जा प्राप्त है। बता दें कि 14 सितम्बर 1949 को संविधान सभा द्वारा आजाद भारत की मुख्य भाषा के रूप में हिंदी को पहचान दी गई थी। साल 1952 में पहली बार हिंदी दिवस का आयोजन हुआ था। तब से ये सिलसिला लगातार बना हुआ है।

हिंदी दिवस हर साल 14 सितंबर को मनाया जाता है। अंग्रेजी, स्पेनिश और मंदारिन के बाद हिंदी दुनिया में चौथी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है। हिंदी दिवस पर हर साल, भारत के राष्ट्रपति दिल्ली में एक समारोह में, हिंदी भाषा में अतुलनीय योगदान के लिए लोगों को राजभाषा पुरस्कार से सम्मानित करते हैं। भारत में हिंदी एक मात्र ऐसी भाषा है, जिसे सबसे अधिक बोला, लिखा व पढ़ा जाता है।

पर आज के समय में युवाओं को अपनी इस भाषा को बोलने में शर्मिंदगी होती है, जो कि सही नहीं है। कई साहित्यकारों ने अपनी बातें कहने के लिए हिंदी को चुना क्योंकि केवल शब्द ही नहीं बल्कि इसके भाव भी लोगों के दिल को छूते हैं। ये मेरा आग्रह है कि बोलचाल और लिखते वक्त हिंदी का इस्तेमाल अधिक से अधिक हो।वहीं दूसरी ओर भारत में अन्य कई भाषाएं विलुप्त हो रही हैं। जो चिंतन का विषय है। ऐसे में हिंदी की महत्ता बताने और प्रचार-प्रसार के लिए हिंदी दिवस को मनाया जाता है।

हर साल हिंदी दिवस 14 सितंबर को मनाया जाता है। इस दिन ही देवनागरी लिपि में हिंदी को भारत की आधिकारिक भाषा के रूप में अपनाया गया था। साल 1953 में पहली बार हिंदी दिवस का आयोजन हुआ था। तभी से यह सिलसिला बना हुआ है। हिंदी दिवस को मनाने का उद्देश्य हिंदी भाषा की स्थिति और विकास पर मंथन को ध्यान में रखना है। देश में करीब 77 प्रतिशत से भी ज्यादा लोग हिंदी बोलते हैं।

आज हर माता-पिता अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा के लिए अच्छे स्कूल में प्रवेश दिलाते हैं। इन स्कूलों में विदेशी भाषाओं पर तो बहुत ध्यान दिया जाता है लेकिन हिंदी की तरफ कोई खास ध्यान नहीं दिया जाता। लोगों को लगता है कि रोजगार के लिए इसमें कोई खास मौके नहीं मिलते। हिंदी दिवस मनाने का अर्थ है गुम हो रही हिंदी को बचाने के लिए एक प्रयास।

हम हमारे ही देश में अंग्रेजी के गुलाम बन बैठे हैं और हम ही अपनी हिंदी भाषा को वह मान-सम्मान नहीं दे पा रहे हैं, जो भारत और देश की भाषा के प्रति हर देशवासियों के नजर में होना चाहिए। हम या आप जब भी किसी बड़े होटल या बिजनेस क्लास के लोगों के बीच खड़े होकर गर्व से अपनी मातृभाषा का प्रयोग कर रहे होते हैं तो उनके दिमाग में आपकी छवि एक गंवार की बनती है। जिस वजह से आज हमारी राष्ट्रभाषा को हमें एक दिन के नाम से मनाना पड़ रहा है।

पहले जहां स्कूलों में अंग्रेजी का माध्यम ज्यादा नहीं होता था, आज उनकी मांग बढ़ने के कारण देश के बड़े-बड़े स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे हिंदी में पिछड़ रहे हैं। इतना ही नहीं, उन्हें ठीक से हिंदी लिखनी और बोलना भी नहीं आती है। भार‍त में रहकर हिंदी को महत्व न देना भी हमारी बहुत बड़ी भूल है।

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