HindiReligion

दूसरे दिन मां दुर्गा के ब्रह्मचारिणी स्वरुप कि की जाती है पूजा

माता ब्रह्मचारिणी को है चीनी का भोग प्रिय

File Photo

Article by Mayurika Goyal: 17 Oct. Vadodara: पार्वतीजी ने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए कई हजार वर्षों तक ब्रह्मचारी रहकर घोर तपस्या की थी, जिससे उनका नाम ब्रह्मचारिणी पड़ गया।

नवरात्र के दूसरे दिन मां दुर्गा के इसी ब्रह्मचारिणी स्वरूप की पूजा की जाती है। मां पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए कई हजार वर्षों तक ब्रह्मचारी रहकर घोर तपस्या की थी। उनकी इस कठिन तपस्या के कारण उनका नाम तपश्चारिणी अर्थात्‌ ब्रह्मचारिणी पड़ गया। वे श्वेत वस्त्र पहनती है, उनके दाएं हाथ में जपमाला तथा बाएं हाथ में कमंडल विराजमान है।

शिवपुराण तथा रामचरितमानस में लिखा है कि मां पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए एक हजार वर्षों तक फलों का सेवन कर तपस्या की थी। इसके पश्चात तीन हजार वर्षों तक पेड़ों की पत्तियां खाकर तपस्या की। इतनी कठोर तपस्या के बाद इन्हें ब्रह्मचारिणी स्वरूप प्राप्त हुआ।

नवरात्रि के दूसरे दिन भक्त अपने मन-मस्तिष्क को ब्रह्मचारिणी के श्री चरणों मे एकाग्रचित करके स्वाधिष्ठान चक्र में स्थित करते हैं और उनके मंत्रों का जाप कर मनचाही इच्छा पूरी होने का वरदान पाते हैं।

कैसे करें मां ब्रह्मचारिणी की पूजा

इनका रूप अत्यन्त मनोहर है और अपने भक्तों की सभी इच्छाएं पूरी करने वाली हैं। मां को चीनी का भोग लगता है और ब्राहमण को भी दान में चीनी ही दी जाती है। मां ब्रह्मचारिणी के चित्र/ प्रतिमा के सामने पुष्प, दीपक, नैवेद्य आदि अर्पण कर स्वच्छ कपड़े पहने आसन पर विराजमान हो और निम्न मंत्र का कम से कम 108 बार जप करें

दधानां करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डल। देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।।

देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से कुंडली में विराजमान बुरे ग्रहों की दशा सुधरती है और व्यक्ति के अच्छे दिन आते हैं। यही नहीं इनकी पूजा से भगवान महादेव भी प्रसन्न होकर भक्त को मनचाहा वरदान देतीं हैं।

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button