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चित्रकूट की खदानों में लड़कियों पर दुराचार

09 July Vadodara : रामायण में उल्लेख है कि ” चित्रकूट के घाट पर भई संतन की भीड……ऐसे भगवान राम के जहां चरण पड़े ऐसे चित्रकूट का आज दृश्य दिलो-दिमाग को हिला देने वाला है।

चित्रकूट की खदानों से लड़कियों पर ठेकेदारों और उनके साथियों द्वारा रोज होते अमानवीय दुराचार, बलात्कार की आई खबर ने समग्र देश के संवेदनशील लोगों को हिला कर रख दिया है। इस विस्तार में गरीबी इतनी है कि खदान में म ज 200 -300 रुपए की दिहाड़ी पर काम करने के लिए लड़कियों को अपना जिस्म बेचना पड़ता है ।इस त्रासदी से त्रस्त यह लड़कियां यहां से भाग जाना चाहती है, पर भागकर जाएं भी तो कहां जाए? इन पर परिवार का पेट पालने की जिम्मेदारी है। मां-बाप सब कुछ जानकर ,समझ कर भी चुप हैं। इन लड़कियों में ज्यादातर नाबालिग लड़कियां है। यानी 10 साल की उम्र से 18 वर्ष की उम्र तक की ही लड़कियां है। खदानों के ठेकेदार मां या परिवार के किसी बड़े को उनके साथ काम पर नहीं जाने देते ,क्योंकि वे उनके बद इरादे को शायद कर्ज न होने दे। चित्रकूट की पहाड़ियों पर 50 क्रशर चलते हैं ,यही इन लड़कियों के परिवार की रोजी-रोटी का जरिया है। ठेकेदार और उसके साथियों द्वारा इन लड़कियों का शारीरिक शोषण हीनता का सबसे निम्नतम नमूना है।

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