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18 नवंबर से 21 नवंबर तक मनाया जा रहा है महापर्व

 

19 Nov. Vadodara: छठ पूजा के पर्व की शुरुआत हो चुकी है। आज इस पर्व का दूसरा दिन है। यूँ तो कोरोना के कारण इस बार त्योहारों में कुछ पाबंदियाँ रखी गयी हैं। लेकिन क्या चीज़ श्रद्धालुओं को अपने पूजन अर्चना से उन्हें कोई रोक सकता है। कोरोना के बीच भी छठ पूज रही महिलाओं का उत्साह तेज़ है। व्रती महिलाएं इस व्रत से जुडी सारी प्रक्रियाएं पूरी करने में जुट जाती हैं। छठ का त्यौहार चार दिनों का होता है और इसका व्रत सभी व्रतों में से अधिक कठिन होता है। और इसलिए इसे महापर्व के नाम से भी जाना जाता है।

हिन्दी पंचाग के अनुसार, छठ पूजा का खरना कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को होता है। खरना को लोहंडा भी कहा जाता है। खरना छठ पूजा में अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। और रात को प्रसाद स्वरुप खीर ग्रहण किया जाता है।

क्यों महत्वपूर्ण है खरना ?

जब छठ की बात आती है तो खरना की एक एहम भूमिका होती है। जैसा की आपको पहले बताया कि यह पर्व चार दिन तक मनाया जाता है। और दूसरा दिन खरना होता है। मगर ये खरना क्या होता है और क्यों छठ में इसे बहुत जरूरी माना जाता है। खरना यानी शुद्धिकरण होता है। जो व्यक्ति छठ का व्रत करता है उसे इस पर्व के पहले दिन यानी खरना वाले दिन उपवास रखना होता है। इस दिन केवल एक ही समय खाना खाया जाता है। यह शरीर से लेकर मन तक सभी को शुद्ध करने का प्रयास होता है। इसकी पूर्णता अगले दिन होती है।

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