FeaturedHindi

स्कूली शिक्षा नीति में भारी बदलाव

स्कूली शिक्षा नीति में भारी बदलाव

File Photo

30 July Vadodara : नई शिक्षा नीति को कैबिनेट से हरी झंडी मिलने के बाद मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदलकर शिक्षा मंत्रालय कर दिया गया है।अन्य व्यापक बदलावों के तहत स्कूली शिक्षा में 1-5वीं तक पढ़ाई में क्षेत्र विशेष की मातृभाषा का इस्तेमाल किया जाएगा।अभी तक चले आ रहे पहले के 10+2 के स्ट्रक्चर को बदलकर 5+3+3+4 कर दिया गया है।

पॉलिसी का लक्ष्य रट्टा मार पढ़ाई के बजाए भारतीय शिक्षा व्यवस्था को समग्र और स्किल आधारित शिक्षा की ओर ले जाना है।इस नीति का आधार वो ड्राफ़्ट है जिसे इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइज़ेशन के पूर्व प्रमुख के कस्तूरीरंगन नीत पैनल द्वारा तैयार किया गया था।

6-8 साल की उम्र में बच्चा 1 और 2 क्लास में पढ़ेगा।इन्हें मिलाकर पांच साल पूरे हो जाएंगे। इसके बाद 8 से 11 की उम्र में 3, 4, 5 क्लास तक की पढ़ाई होगी और 11 से 14 की उम्र में 6, 7, 8 क्लास तक की पढ़ाई होगी। 14 से 18 की उम्र के पड़ाव में छात्र 9, 10, 11, 12 क्लास की पढ़ाई पूरी करेंगे।

नई शिक्षा नीति की मुख्य बातें

* नई शिक्षा नीति के अनुसार बोर्ड परीक्षाएं जानकारी पर आधारित होंगी, यानि अधिक व्यावहारिक होंगी।

* बोर्ड परीक्षा को दो भागों में बांटा जा सकता है जो वस्तुनिष्ठ और विषय आधारित हो सकते हैं।

* नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत एमफिल पाठ्यक्रमों को बंद किया जाएगा।

* मल्टीपल एंट्री और एग्जिट व्यवस्था में पहले साल के बाद सर्टिफिकेट, दूसरे साल के बाद डिप्लोमा और तीन-चार साल बाद डिग्री दी जाएगी।

* उच्च शिक्षा में प्रमुख सुधारों में 2035 तक 50 फीसदी सकल नामांकन अनुपात का लक्ष्य और एक से ज्यादा प्रवेश/निकास का प्रावधान शामिल है।

* देश में उच्च शिक्षा के लिए एक ही नियामक होगा। इसमें अनुमति और वित्त के लिए अलग-अलग प्रावधान होंगे। यह नियामक ‘ऑनलाइन सेल्फ डिस्क्लोजर बेस्ड ट्रांसपेरेंट सिस्टम’ पर काम करेगा।

* विधि (कानून) और चिकित्सा कॉलेजों को छोड़कर सभी उच्च शिक्षण संस्थान एक ही नियामक द्वारा संचालित होंगे। निजी और सार्वजनिक उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए साझा नियम होंगे।

* चार साल का डिग्री प्रोग्राम फिर एमए और उसके बाद बिना एमफिल के सीधा पीएचडी कर सकते हैं।

* जो छात्र शोध के क्षेत्र में जाना चाहते हैं उनके लिए चार साल का डिग्री प्रोग्राम होगा, जबकि जो लोग नौकरी में जाना चाहते हैं वो तीन साल का ही डिग्री प्रोग्राम करेंगे।

* लक्ष्य निर्धारित किया गया है कि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का छह फीसदी शिक्षा में लगाया जाए जो अभी 4.43 फीसदी है।

* अमेरिका के एनएसएफ (नेशनल साइंस फाउंडेशन) की तर्ज पर यहां एनआरएफ (राष्ट्रीय शोध फाउंडेशन) लाया जाएगा।

* राष्ट्रीय शोध फाउंडेशन में विज्ञान के साथ सामाजिक विज्ञान भी शामिल होगा। ये बड़े प्रोजेक्ट्स को वित्तीय मदद उपलब्ध कराएगा। ये शिक्षा के साथ शोध में हमें आगे आने में मदद करेगा।

* हिंदी और अंग्रेजी भाषा के अलावा आठ क्षेत्रीय भाषाओं में भी ई-कोर्स होगा। वर्चुअल लैब के कार्यक्रम को आगे बढ़ाया जाएगा।

* शिक्षा (टीचिंग, लर्निंग और एसेसमेंट) में तकनीकी को बढ़ावा दिया जाएगा। तकनीकी के माध्यम से दिव्यांगजनों में शिक्षा को बढ़ावा दिया जाएगा।

* शिक्षा का माध्यम पांचवी कक्षा तक मातृभाषा, क्षेत्रीय भाषा या घर की भाषा में होगा। बालिकाओं के लिये लैंगिक शिक्षा कोष की बात कही गई है।

* राष्ट्रीय पाठ्यचर्या 2005 के 15 वर्ष हो गए हैं, अब नई पाठ्यचर्या आएगी। शिक्षकों की शिक्षा के पाठ्यक्रम के भी 11 साल हो गए हैं, इसमें भी सुधार होगा।

* बच्चों के रिपोर्ट कार्ड के स्वरूप मे बदलाव करते हुए समग्र मूल्यांकन पर आधारित रिपोर्ट कार्ड की बात कही गई है।
हर कक्षा में जीवन कौशल परखने पर जोर होगा ताकि जब बच्चा 12वीं कक्षा से निकलेगा तो उसके पास बेहतर कौशल होगा।

Tags
Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Close
Close