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अखबार में क्या छपता है यह सांसद को कैसे पता होगा : भरत डांगर

*संजय नगर के विस्थापित मिले सांसद रंजनबेन भट्ट से..

*सांसद और विस्थापित के बीच आवास निर्माण मामले घर्षण

06 July Vadodara : हरणी वारसिया रिंग रोड पर 1841 परिवार एक गढ्ढे जैसी जमीन पर कच्चे पक्के मकान बनाकर सालों से रहते थे।3 सालों पहले स्मार्ट सिटी अंतर्गत 1841 आशियाने उजाड दिए गए और कहा गया कि 1 साल में आपको पक्के और सुविधाओं वाले आवास बना कर दिए जाएंगे और तब तक दिया जाएगा प्रति महीने ₹2000 का किराया. वडोदरा महानगर पालिका के इस दावे को 3 साल बीत चुके हैं। 3 साल के बाद भी ना आवास की नींव रखी गई है,ना आवास योजना शुरू करने की कोई तैयारी दिखाई जा रही है,और ना ही विस्थापितों को समय से किराया मिल रहा है।ऐसे में 1841 परिवार बेघर और मारे मारे फ़िर रहे हैं।

पिछले 3 सालों से संजय नगर के विस्थापित आवास बना कर दिए जाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन मोटी चमड़ी के अधिकारी या जनप्रतिनिधि इन गरीबों की सुनने के लिए तैयार नहीं है। संजय नगर के विस्थापित पिछले कई दिनों से संजयनगर मैदान में ही आवास बनाने की मांग के साथ डेरा डालकर धरना कर रहे हैं। इस मामले को लेकर आज विस्थापित शहर की सांसद रंजनबेन भट्ट के पास पहुंचे, और समूचे मामले से उन्हें अवगत कराया। इस दौरान सांसद द्वारा क्या आप लोगों से मिलने में संजय नगर आऊ?? और पेपर में क्या छपता है वह सांसद को कैसे पता होगा ऐसा बयान वीएमसी के पूर्व मेयर और नगरसेवक भरत डांगर द्वारा दिए जाने से विस्थापितों में रोष देखा गया। यहां सीधा सवाल यह उठता है की क्या सांसद पेपर नहीं पढती है, जो उन्हें शहर के मामलों के बारे में पता ना हो !!!

पिछले कई महीनों से दरबदर भटक रहे विस्थापितों को ऊंची आवाज में बात करने से भी रोका गया।जिससे आक्रोशित विस्थापितों ने ताली बजाते हुए विरोध प्रदर्शित किया और आवास बनाकर नहीं दिए जाने पर आने वाले वक्त में दिल्ली में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंच कर मामले को उठाने की कटिबद्धता जताई। सीमा राठौर का कहना यह भी है कि मुख्यमंत्री ने 1 साल पहले ही इस योजना को पूरा करने के निर्देश दे दिए हैं लेकिन फिर भी मुख्यमंत्री के आदेशों को भी भारतीय जनता पार्टी के नेता घोलकर पी गए हैं।

वहीं सांसद रंजनबेन भट्ट ने इस मामले से प्रबंधन और सरकार अवगत करा कर आवास योजना जल्द शुरू किए जाने का भरोसा जताया। जबकि हकीकत यह है कि मुख्यमंत्री ने 1 साल पहले ही इस आवास योजना को बनाने के निर्देश दिए थे, उसके बाद भी आवास योजना शुरू तक नहीं की गई है।

बरसात का मौसम है और ऐसे में खुले आसमान के नीचे डेरा डाल कर बैठे संजय नगर के विस्थापितों को कब न्याय मिलेगा इसका जवाब फिलहाल कोई नहीं दे पा रहा है।बरसती बारिश के बीच वहां के लोग परिवार के साथ खुले में रह रहे हैं ऐसे में यहां कोरोना संक्रमण का खतरा भी विस्थापितों पर मंडरा रहा है।फिलहाल सिर्फ यही कहा जा सकता है की एक था संजय नगर अब जाने कब फिर से बसेगा!!!

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