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राजस्थान में गुर्जरों की होगी महापंचायत

भरतपुर समेत 4 इलाकों में रहेगी इंटरनेट सेवा बंद

File Photo

17 Oct. Vadodara: राजस्थान के भरतपुर जिले में गुर्जर आरक्षण को लेकर शनिवार को महापंचायत होने जा रही है। महापंचायत अड्ड़ा गाँव में होने जा रही है। यह महापंचायत शनिवार को सुबह 11 बजे से शुरू होगी। इसके मद्देनज़र भरतपुर जिले के वीर,बयाना, भुसावर और रूपवास में 16 अक्टूबर की रात 12 बजे से 17 अक्टूबर की रात 12 बजे तक इंटरनेट सेवा बंद कर दी जाएगी। इसके अलावा सोशल मीडिया जैसे फेसबुक, व्हाट्सऎप और ट्विटर पर भी पाबन्दी रहेगी। वॉइस कॉल की सेवा जारी रहेगी। इस महापंचायत में गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक किरोड़ी सिंह बैंसला भी शामिल रहेंगे।

महापंचायत आयोजन करने का मुख्य कारण है गुर्जर मोस्ट बैकवर्ड क्लास (एमबीसी) में 5 प्रतिशत आरक्षण को केंद्र की 9वीं की अनुसूची में शामिल करने की मांग है। इस महासभा में राजस्थान और अन्य राज्य से 20 हज़ार से ज्यादा लोगों के जुड़ने की संभावना है। गुर्जर बाहुल्य नहरा क्षेत्र के 80 गाँवों की ओर से महापंचायत बुलाई गयी है।

महापंचायत को लेकर पुलिस-प्रशासन भी सतर्क

गुर्जरों द्वारा की जा रही महापंचायत को लेकर पुलिस-प्रशासन भी सतर्क हो गयी है। इस सभा की तैयारियों पर निगरानी राखी जा रही है। गुरुवार को कलेक्टर- एसपी के बाद शुक्रवार को प्रशिक्षु आईपीएस सुमित नेहरडा, एएसपी एडीएफ राजेंद्र वर्मा, डिप्टी एसपी खींवसिंह राठोड ने भी तैयारियों पर निगरानी राखी। अतिरिक्त पुलिसबल भी बुलाया गया है, और उन्हें बयाना-हिण्डौन के मार्ग पर जगह-जगह तैनात किया जायेगा, जिससे किसी भी प्रकार की हिंसा को टाला जाये।

आरक्षण के लिए फिर एक जुट होंगे गुर्जर

आरक्षण को लेकर कई बार गुर्जर प्रदर्शन कर चुके हैं। महापंचायत को लेकर शुक्रवार की दोपहर शेरगढ़ स्थित राजेश पायलट स्कूल में गुर्जर समाज की बैठक हुई। बैठक में दो साल पहले गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति से निकाले जाने के बाद से भीतरी तौर पर नाराज चल रहे थे गुर्जर नेता हिम्मत पाड़ली (दौसा), पूर्व सरपंच श्रीराम बैंसला, दीवान शेरगढ़ ने समाज के समक्ष अपनी बात को रखा।

किन मांगो पर बिठाई जा रही है महापंचायत?

  • आरक्षण को केन्द्र की 9वीं अनुसूची में शामिल किया जाए।
  • बैकलॉग की भर्तियां निकालनी जाएं। और भर्ती में गुर्जरों को 5 प्रतिशत आरक्षण दिया जाए।
  • एमबीसी कोटे से भर्ती हुए 1200 कर्मचारियों को नियमित किया जाए।
  • आंदोलन के सभी शहीदों के परिजन को सरकार के वादे के मुताबिक नौकरी, मुआवजा दिया जाए।
  • आंदोलन के दौरान दर्ज सभी मुकदमों को वापस लिया जाए।
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