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भारत में बढ़ते कोरोना आतंक में लापरवाह लोगों के कारण तबाही का डर

भारत में बढ़ते कोरोना आतंक में लापरवाह लोगों के कारण तबाही का डर

File Photo

25 July Vadodara : भारत में कोरोना के प्रथम ढाई लाख केस होने में 98 दिन लगे थे। और 5 लाख तक 19 दिनों में यह आंकड़ा पहुंच गया। 7.30 लाख के आंकड़े तक पहुंचने के लिए कोरोना को केवल 12 दिन लगे ,और 10 लाख के आंकड़े को पार करने में केवल 8 दिन लगे हैं। इसका कारण काफी हद तक लोगों की लापरवाही है । वायरस की दुनिया के अग्रणी वैज्ञानिक डॉक्टर इयान लिपिकीन ने इस मुद्दे चिंता व्यक्त की है।

अमेरिका की एम आई टी यूनिवर्सिटी अनुसार यदि भारत में यही ट्रेंड रहा तो 2021 के प्रारंभ में प्रतिदिन ढाई लाख केस दर्ज होंगे। यह बहुत बड़ा विस्फोट होगा। इसके कई कारणों में मेडिकल सुविधाओं की निम्न स्तर की सुविधा, और क्षमता, लॉकडाउन के बाद सोशल डिस्टेंस के प्रति लापरवाह होना है और मास्क न पहनना जैसी लापरवाही है।बेंगलुरु के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस ने डेटा देते हुए सरकार को कह दिया है कि यदि सरकार ने कडी और उचित भूमिका नहीं की नागरिक यूं ही लापरवाह बर्ताव करेंगे तो 1 सितंबर तक कोरोना के केस का स्कोर 35 लाख तक पहुंच जाए तो इसमें कोई शंका नहीं है।

भारत की 130 करोड़ की जनसंख्या और घनत्व सबसे बड़ी चुनौतियां हैं ।ऐसी स्थिति में मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग ही बचा पाएगा ।डॉ.इयान लीपिकीन ऐसे वैज्ञानिक है जो निर्भीक होकर मरीजों के बीच घूमते है।वे कोरोना का चीन में प्रथम केस दर्ज होते ही चीन भी पहुंच गए थे, और अमेरिका में प्रतिबंध लगने से पहले वापस आ गए ।

वे हेतु ऐसा कर रहे हैं। वे स्वयं कोरोना के मरीज हो गए ,और अपने की रिपोर्ट जांचने का उन्होंने मौका ले लिया। वे कहते हैं प्रत्येक वायरस का शरीर पर अलग-अलग असर होता है । दो छींक और एक खांसी भी अलग हो सकती है ।वायरस के कुल और गोत्र तक वे पहुंचना चाहते हैं।उनके अनुसार वुहान मार्केट में पहले से ही कोरोना के मरीज रहे व्यक्ति ने प्रवेश किया होगा, और यह रोग वुहान से निकलकर विश्व भर में फैल गया। उन्होंने भारत में कोरोना के भविष्य को बहुत ही तबाही करने वाला बताया है ।डॉक्टर और सभी वैज्ञानिकों के लिए यह बहुत बड़ी चुनौती होगा।

ऐसी स्थिति निर्माण होने का कारण भारत की सरकार का ढीला रवैया और चीन जैसे शासन प्रणाली का न होना कारण है।चीन में लॉक डाउन भंग करने वाले को बहुत ही कडी व भयानक सजा दी जाती थी, और यह सजा लोगों को दिखाई जाती थी ,ताकि लोगों में अच्छी तरह से डर बैठ जाए ।आज भी चेहरे पर मास्क और दूसरा लोगों के बीच सोशल डिस्टेंसिंग होना जरूरी है। मास्क न पहनना खुद के लिए और दूसरों के लिए मौत का कारण बन सकता है।

अमेरिका और भारत जैसे देशों के लोगों को मास्क पहनना पसंद नहीं है।ट्रंप तो खुद कहते हैं कि वे लोगों पर मास्क पहनने का हुक्म नहीं दे सकते। डॉ.इयान के अनुसार मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग ही नागरिकों कोरोना से बचा सकता है ,और देश को भी बचा सकता है।

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