RRB और पोस्टल विभाग का विलय कर ,बनेगा बड़ा बैंक

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28 July Vadodara : चिट्ठी लिखने का भी अपना ही एक मज़ा था, डाकिया जब चिट्ठी लेकर आता था तो, किसकी चिट्ठी है ,यह जानने की ललक रहती थी। और यदि कभी डाकिया टेलीग्राम लेकर आता था तो टेलीग्राम की आवाज सुनते ही दिल अपनी धड़कने बढ़ जाति थी। टेलीग्राम यानी बुरी खबर, यही एक मान्यता थी। चिट्ठी को लेकर कई गीत भी लिखे गए हैं ।दीवाली पर ग्रीटिंग कार्ड आते थे। इनमें जो बहुत ही सुंदर होता था, उसे बच्चे संजोया करते थे। यह कार्ड्स और साल भर में आती अपनों की चिट्ठियां बार बार पढ़ते थे ।

वह भी एक मज़ा था।रक्षाबंधन पर ही राखी भेजने के कुरियर में अब भाई को दो शब्द बहन द्वारा लिखे जाते है। आज के डिजिटल , मोबाइल और व्हाट्सएप, वीडियो चैट जैसे माध्यमों के आने के बाद अब जैसे चिट्ठी लिखना ही लोग भूल गए हैं। अब तो दिवाली पर किसी का भी कार्ड नहीं आता, और डाकिया बोहनी भी नहीं मांगता,क्योंकि उसका आना ही बंद हो गया है।अब तो भारतीय डाक विभाग भी नुकसान में चल रहा है। कामकाज घटा है ,और कर्मचारी की संख्या ज्यादा है, ऐसे में पोस्ट विभाग को एक बैंक के रूप में विकसित करने की ओर सरकार सक्रिय होने जा रही है।

देश में कार्यरत रीजनल रूरल बैंक यानी RRB की शाखाओं का नेटवर्क है,जिसे देश के 1.56 लाख पोस्ट ऑफिस वाले डाक विभाग के साथ जोड़ा जाएगा। सरकार इस सूचित बैंक पर होल्डिंग कंपनी के माध्यम से नियंत्रण रखेगी. आरआरबी में सरकार का 50% हिस्सा है. आरआरबी के अन्य शेर धारकों में पब्लिक सेक्टर की बैंकों का 35% हिस्सा, राज्य सरकार का 15% हिस्सा रहेगा । यह आयोजन सरकार की पब्लिक सेक्टर की बैंकों के कंसोलिडेशन के आयोजन के साथ संयोजित है। जिस प्रकार सरकार बैंकों के निजीकरण के बारे में गहनता से सोच रही है, ऐसे में एक समय ऐसी स्थिति आ सकती है कि, जब भारत में पब्लिक सेक्टर में केवल स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और सूचित इंडिया पोस्ट बैंक ही काम कर रही होंगी।

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