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The Father of the White Revolution कहलाये जाने वाले डॉ. वर्गीस कुरियन की 99वी जन्मजयंती

कई कोआपरेटिव डेरी फार्मर्स की ज़िन्दगियों को सामाजिक,राजनीतिक,और सबसे एहम आर्थिक तौर पर सवारा

26 Nov. Vadodara: आज हर घर में अमूल के कई प्रोडक्ट्स को इस्तेमाल किया जाता है मगर क्या आप जानते हैं की अमूल को इस मुकाम तक पहुँचाने वाले कौन है?

डॉ. वी कुरियन जब तक जिए तो सिर्फ एक ही लाइफ पर्पस के साथ जिए, उनके इस ध्येय को एक शब्द में बयान करूँ तो वो था एम्पावरमेंट यानी सशक्तिकरण-… छोटे और मार्जिनल किसानों और भूमिहीन मजदूरों का सशक्तिकरण।

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डॉ. वर्गीस कुरियन का जन्म 26 नवम्बर 1921, केरल के कोज़ीकोडे में हुआ था। वे इंडियन इंजीनियर और इंटरप्रेन्योर थे, जिन्होंने भारत के वाइट रेवोलुशन यानी श्वेत क्रांति में अपना बहुत बड़ा योगदान दिया। फादर ऑफ़ वाइट रेवोलुशन माने जाने वाले डॉ. कुरियन ने देश में डेरी प्रोडक्ट्स इम्पोर्ट से लेकर उन्होंने किसानो के सहयोग से भारत को दुनिया का सबसे बड़ा मिल्क प्रोडूसर वाला देश बनाया।

उनका यह मिल्क रेवोलुशन बहुत ही सफल रहा, जिसके बाद उन्होंने कई कोआपरेटिव डेरी फार्मर्स की ज़िन्दगियों को सामाजिक,राजनीतिक,और सबसे एहम आर्थिक तौर पर सवारा।

कुरियन को मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी में पढाई करने के लिए एक गवर्नमेंट स्कॉलरशिप मिली, जहां उन्होंने (1948 में ) मैकेनिकल इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री प्राप्त की। जब वह भारत लौटे, तो उन्हें स्कॉलरशिप की एक शर्त के रूप में, गुजरात राज्य के आनंद में गवर्नमेंट रिसर्च ऑफ़ क्रीमीरी में काम करना था, जो उन्होंने 1949 में शुरू किया था।

उस समय, डेयरी किसानों, कैरा जिला के सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ (Kaira District Co-operative Milk Producers’ Union) की एक छोटी सहकारी संस्था, एक अटकी हुई व्यवस्था को दूर करने के लिए काम कर रही थी, जिसमें छोटे स्थानीय डेयरियों ने बहुत कम पैसे में एक बड़े सप्लायर को दूध बेचा, और उस सप्लायर ने उस दूध को बॉम्बे बेचा और पर्याप्त प्रॉफिट पर बेचा।

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सहकारी समिति के अध्यक्ष त्रिभुवनदास पटेल ने कुरियन को संगठन को मजबूत बनाने में मदद करने के लिए कहा। कुरियन सहकारी के प्रबंधक बन गए (जो बाद में अमूल कहलाए और भारत के सबसे बड़े खाद्य उत्पादकों में से एक बन गए)।

उनके नेतृत्व में, संगठन ने डेयरी उत्पादों के लिए इक्विपमेंट्स लाये गए और डेरी प्रोडक्ट्स को स्टोर किया और एक विश्वसनीय सप्लायर साबित हुए। अन्य डेरी सहकारी समितियों का गठन एक समान मॉडल पर किया गया था, और 1965 में कुरियन नए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के पहले अध्यक्ष बने।

उन्होंने ऑपरेशन फ्लड की स्थापना की, जिसे “श्वेत क्रांति” के रूप में भी जाना जाता है, दूध उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से एक लॉन्ग-रेंज प्रोग्राम का आयोजन किया, जिसका एक मात्र ध्येय था, ज्यादा से ज्यादा मिल्क प्रोडक्ट्स को सही दाम में कस्टमर्स तक पहुँचाना।

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इसके अलावा, उन्होंने 1973 में गुजरात को-ऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन की स्थापना की। कुरियन को कई अवार्ड्स भी प्राप्त हुए, उनमें से सामुदायिक नेतृत्व के लिए 1963 में रेमन मैग्सेसे पुरस्कार और 1989 में विश्व खाद्य पुरस्कार यानी वर्ल्ड फ़ूड अवार्ड। Padma Shree, Padma Bushan और Padma Vibhushan से भी नवाज़ा गया है। ऐसे कई अवार्ड्स उन्होंने अपने काम से अपने नाम किये हैं।

अमूल ने भी ट्वीट कर डॉ. वर्गीस कुरियन को श्रद्धांजलि दी।

अमूल ने भी ट्वीट कर डॉ. वर्गीस कुरियन को उनके 99 वे जन्मजयंती पर श्रद्धांजलि दी।

 

खुद के लिए नहीं लेकिन समाज के लिए कुछ कर गुज़र ने की जब कोई ठान ले तो ऐसे व्यक्तियों की लिस्ट में एक व्यक्ति, डॉ. वर्गीस कुरियन का नाम याद आता है और इसीलिए उन्हें सोशल एन्टेर्प्रेनुएर का दर्जा भी दिया गया था। 9 सितंबर, 2012, गुजरात राज्य के नडियाद, में उन्होंने इस दुनिया से विदाई ली।

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