“खालिस्तान की मांग करने वाले भी हिंदी को नहीं मानते”

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30 April 2022

कन्नड़ स्टार किच्चा सुदीप का हिंदी को लेकर दिया बयान इंडस्ट्री पर विवाद बन गया है। उनके इस विवाद पर अजय देवगन ने पलटवार किया तो वहीं मनोज बाजपेयी और नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने साउथ इंडस्ट्री का सपोर्ट किया। लेकिन इसी बीच इस विवाद में कंगना रनोट का भी नाम जुड़ गया है। दरअसल कंगना अपनी फिल्म धाकड़ के ट्रेलर लॉन्च में पहुंची थी।

जहां उन्होंने कहा कि हिंदी को संविधान ने हिंदी को राष्ट्रीय भाषा चुना है और हमें इसे सम्मान करना चाहिए। कंगना ने राय देते हुए कहा कि मेरी माने तो संस्कृत राष्ट्रीय भाषा होनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इस देश के युवाओं को भटकाया जा रहा है।

कंगना ने पूरे विवाद पर बात करते हुए कहा, हमारा जो यह सिस्टम और सोसायटी है उसमें कई तरह के लोग हैं। अलग-अलग कल्चर हैं, रिश्ते नाते हैं और भाषाएं हैं। हर एक व्यक्ति का जन्मसिद्ध अधिकार है कि वह अपने कल्चर पर गर्व करे। जैसे मैं पहाड़ी हूं तो मुझे अपने कल्चर और भाषा पर गर्व है। लेकिन जैसे हमारा देश है वह पूरी एक यूनिट हैं। हम सभी को एक धागा चाहिए जो चला सके। हम सभी को अपने सविंधान का सम्मान करना चाहिए और इसने हिंदी को राष्ट्रीय भाषा बनाया है। अगर देखा जाए तो तमिल हिंदी से भी ज्यादा पुरानी है। लेकिन इससे भी पुरानी है संस्कृत। मेरी मानें तो मुझे लगता है संस्कृत को राष्ट्रीय भाषा होनी चाहिए।

कंगना ने आगे कहा कि कन्नड़, तमिल से लेकर गुजराती और हिंदी सब इसी संस्कृत से आई हैं। संस्कृत को ना बनाकर हिंदी को क्यों राष्ट्रीय भाषा बनाया। हालांकि इसका जवाब मेरे पास नहीं हैं। ये उस समय के लिए हुए निर्णय हैं, लेकिन जब खालिस्तान की मांग होती है तो वे कहते हैं कि हम हिंदी को नहीं मानते हैं। हमारे देश के युवाओं को भटकाया जा रहा है। ये लोग संविधान का अपमान कर रहे हैं। तमिल लोग अलग नेशन चाहते थे। बंगाल के लोग रिपब्लिक की मांग करते हैं और कहते हैं कि हम हिंदी भाषा को लैंग्वेज नहीं समझते। तो ऐसे में आप हिंदी को मना नहीं कर रहे हैं, आप दिल्ली को इनकार कर रहे हैं कि वहां सेंट्रल गर्वमेंट नहीं है।

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